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प्रेम की निशानी ताजमहल

✍��दुनिया के नए सात अजूबों में अपना नाम दर्ज करवा चुका ताजमहल शाहजहां और उनकी बेगम मुमताज महल के प्रेम की निशानी के तौर पर विश्व पटल पर अपनी पहचान स्थापित कर चुका है.

✍��यह बात तो हम सभी कई बार पढ़ और सुन चुके हैं कि लगभग 20,000 मजदूरों के कठोर श्रम के कारण यह इमारत 22 वर्षों में बनकर तैयार हुई थी

✍��1653 में बनकर तैयार हुए ताजमहल पर 32 करोड़ रुपए की लागत लगी थी.

✍��अपनी चहेती बेगम मुमताज महल की याद में बनाया गया ताजमहल आज देश-विदेश के सैलानियों को अपनी खूबसूरती से आकर्षित करता है.

✍��इन सब के अलावा संगमरमर से बनी इस खूबसूरत इमारत से जुड़े और भी बहुत से तथ्य हैं: 

��GK IS BEST FOR EVER GROUP'S��

��बड़े कमाल के हैं यह विदेशी अंधविश्वास��

आगरा का ताज हासिल करने से पहले शाहजहां का नाम शहजादा खुर्रम था.

���अर्जुमंद बानो की बेपनाह खूबसूरती से प्रभावित होकर शाहजहां ने उन्हें अपनी तीसरी बेगम बनाया था.

���निकाह के बाद उनका नाम मुमताज महल रखा गया, जिसका अर्थ है महल का बेशकीमती नगीना.

���चौदहवीं संतान को जन्म देते समय मुमताज महल ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया.

���ताजमहल की सजावट में 28 प्रकार से भी ज्यादा उत्तम जड़ाऊ रत्नों का प्रयोग किया गया है.

���समय देखने के लिए घड़ियां नहीं थीं इसीलिए दिन के समय सूरज और रात के समय चांद की रोशनी जब ताजमहल पर पड़ती थी उसी के अनुसार समय का अनुमान लगाया जाता था.

���रोशनी के कारण ताजमहल का रंग भी बदलता है. कुछ लोगों का तो यह भी मानना है कि ताजमहल का बदलता रंग महिलाओं के परिवर्तित होते मूड को दर्शाता है.

���ताजमहल की बनावट में लगने वाले सामान को लाने ले जाने के लिए 1,000 हाथियों का प्रयोग किया गया था.

���मुमताज महल की वास्तविक कब्र के एक तरफ अल्लाह के 99 नाम को जड़ा गया है.

���1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेज सैनिकों ने ताजमहल में जड़े अनमोल रत्नों को  निकाल लिया था.

���ताजमहल को और अधिक खूबसूरत बनाने के लिए इसमें जगह-जगह पर कुरान की आयतों को भी गोदा गया है.

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